मीर तक़ी मीर: उर्दू ज़बान के सबसे बड़े साहसी और बे-तकल्लुफ़ शायर
शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी की नज़र में मीर तक़ी मीर ने 'फ़साहत' (भाषा की शुद्धता) पर 'बलाग़त' (प्रभावशाली अभिव्यक्ति) को तरजीह दी और ज़बान के इस्तेमाल में वह अपने समकालीनों के मुक़ाबले में सबसे ज़्यादा बे-बाक और साहसी थे।