शोहरत, शराब और त्रासदी: मजाज़ की ज़िंदगी का पतन और वज़ादारी (शिष्टाचार)
बे-पनाह मक़बूलियत, मुहब्बत में नाकामी और आर्थिक बदहाली ने मजाज़ को शराब की तरफ़ धकेल दिया, मगर इन तमाम तल्ख़ियों (कड़वाहटों और दुखद अनुभवों) के बा-वुजूद उनकी वज़ादारी (शिष्टाचार) और ख़ुलूस (सच्चाई) में कभी कमी नहीं आई।