मीर और ग़ालिब की कल्पना की तुलना: तजरीद (अमूर्तता) और तज्सीम (मूर्तता) की कश्मकश
इस लेख में मीर तक़ी मीर और मिर्ज़ा ग़ालिब की काव्यात्मक कल्पना का तुलनात्मक जायज़ा लिया गया है, जिसमें ग़ालिब की 'तजरीदियत' (Abstraction) और मीर की 'तज्सीम' (Concreteness) के फ़र्क़ को स्पष्ट किया गया है।