मीर तक़ी मीर की ज़बान: रोज़मर्रा की ग़लत-फ़हमी और शायराना हक़ीक़त
यह लेख इस आम ग़लत-फ़हमी को दूर करता है कि मीर तक़ी मीर सिर्फ़ रोज़मर्रा और बोल-चाल की ज़बान के शायर थे। दरअस्ल उन्होंने आम ज़बान को बुनियाद बनाकर एक अज़ीम और पेचीदा शेरी उसलूब (काव्य शैली) को जन्म दिया।