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मुस्तफ़ा ज़ैदी की 10 चयनित नज़्में

मुस्तफ़ा ज़ैदी उर्दू

शायरी के उन प्रतिष्ठित शायरों में शुमार होते हैं, जिनकी रचनाओं में प्रेम, तन्हाई, महरूमी, अधूरी आकांक्षाओं और मानवीय संवेदनाओं की गहरी गूँज सुनाई देती है। उनकी नज़्मों में भावनाओं की तीव्रता, रोमानी कैफ़ियत, समकालीन चेतना और जीवन की तल्ख़ सच्चाइयों का ऐसा संगम मिलता है, जो पाठक को अपने प्रभाव में ले लेता है। उनकी अनूठी शैली, दिलकश अभिव्यक्ति और भावनाओं की गहराई उनकी शायरी को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। इस संग्रह में मुस्तफ़ा ज़ैदी की 10 चुनिंदा नज़्में शामिल हैं, जो उनके वैचारिक और भावनात्मक कैनवस के विभिन्न रंगों से परिचित कराती हैं और उर्दू नज़्म में उनके रचनात्मक योगदान को समझने का एक ख़ूबसूरत अवसर प्रदान करती हैं।

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आख़िरी बार मिलो

आख़िरी बार मिलो ऐसे कि जलते हुए दिल

मुस्तफ़ा ज़ैदी

रात सुनसान है

मेज़ चुप-चाप घड़ी बंद किताबें ख़ामोश

मुस्तफ़ा ज़ैदी

एक शाम

यूँ तो लम्हों के इस तसलसुल में

मुस्तफ़ा ज़ैदी

विसाल

वो नहीं थी तो दिल इक शहर-ए-वफ़ा था जिस में

मुस्तफ़ा ज़ैदी

वफ़ा कैसी?

आज वो आख़िरी तस्वीर जला दी हम ने

मुस्तफ़ा ज़ैदी

तिरी हँसी

फ़लक का एक तक़ाज़ा था इब्न-ए-आदम से

मुस्तफ़ा ज़ैदी

पहला पत्थर

सबा हमारे रफ़ीक़ों से जा के ये कहना

मुस्तफ़ा ज़ैदी

सफ़र-ए-आख़िर-ए-शब

बहुत क़रीब से आई हवा-ए-दामन-ए-गुल

मुस्तफ़ा ज़ैदी

मिरी पत्थर आँखें

अब के मिट्टी की इबारत में लिखी जाएगी

मुस्तफ़ा ज़ैदी

रेस्तौरान में

हम इक चाय की मेज़ पे आ कर

मुस्तफ़ा ज़ैदी
बोलिए