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तन्हाई: एक उनवान 10 नज़्में

इस चयन में “तन्हाई”

शीर्षक के अंतर्गत विभिन्न कवियों द्वारा रचित ऐसी दस नज़्मों को शामिल किया गया है, जो मनुष्य के भीतर और बाहर मौजूद हर प्रकार के अकेलेपन को समेटे हुए हैं। इन्हें पढ़ने से आंतरिक पीड़ा और एकांत के सभी पहलू और दृष्टिकोण सामने आते हैं।

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तन्हाई

फिर कोई आया दिल-ए-ज़ार नहीं कोई नहीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तन्हाई

अँधेरी रात की इस रहगुज़र पर

शहरयार

तन्हाई

तन्हाई-ए-शब में है हज़ीं क्या

अल्लामा इक़बाल

तन्हाई

आज अपने कमरे में

राही मासूम रज़ा

तंहाई

तन्हाई की रात

सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम

तंहाई

वो आँखों पर पट्टी बाँधे फिरती है

आदिल मंसूरी

तन्हाई

इस सफ़ में भी सब दुश्मन हैं

पीरज़ादा क़ासिम

तन्हाई

तन्हा बैठा हूँ कमरे में माज़ी की तस्वीर लिए

चन्द्रभान ख़याल

तन्हाई

याद की किरनें परियाँ बन कर

शकील जाज़िब

तन्हाई

कुछ दिनों से इक चिड़िया

मोहम्मद अल्वी
बोलिए