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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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रात: एक उनवान 10 नज़्में

इस चयन में विभिन्न कवियों

द्वारा रचित वे कविताएँ शामिल की गई हैं जिनका शीर्षक “रात” है। इस संकलन को पढ़ने से एक ही विषय पर अलग-अलग कवियों की वैचारिक दुनिया का परिचय मिलता है।

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रात

गया दिन हुई शाम आई है रात

इस्माइल मेरठी

रात

मिरी दहलीज़ पर बैठी हुई ज़ानू पे सर रक्खे

गुलज़ार

रात

मैं देखता हूँ

मंज़र लतीफ़

रात

रात कितनी साहिर है

हमीदा शाहीन

रात

आँधियाँ आसमानों का नौहा ज़मीं को सुनाती हैं

सज्जाद बाक़र रिज़वी

रात

फ़सुर्दा रात सितारों के क़ाफ़िलों को लिए

आबिद आलमी

रात

याद के समंदर में

बदनाम नज़र

रात

अंध से भरे बिस्तर पर

सलाहुद्दीन परवेज़

रात

अभी रात आएगी

मोहम्मद अल्वी

रात

दयार-ए-शब है कि इक पेड़ काले पत्तों का

सोहन राही
बोलिए