राज़ एहतिशाम के शेर
इस लरज़ते अश्क की हिम्मत तो देख
डट गया है क़हक़हे के सामने
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टैग : आँसू
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नेज़ा हो कि प्याला लब-ए-इंकार सलामत
ये सिलसिला सुक़रात से शब्बीर तलक है