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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Maulvi Aslam Waraich's Photo'

मौलवी असलम वड़ाइच

1940 - 2019 | सरगोधा, पाकिस्तान

ग्रामीण समाज और मेहनतकश तबक़े की भावनाओं को अपने प्रभावशाली काव्य-स्वर में अभिव्यक्त करने वाले प्रसिद्ध शायर, उर्दू और पंजाबी दोनों भाषाओं में शायरी की

ग्रामीण समाज और मेहनतकश तबक़े की भावनाओं को अपने प्रभावशाली काव्य-स्वर में अभिव्यक्त करने वाले प्रसिद्ध शायर, उर्दू और पंजाबी दोनों भाषाओं में शायरी की

मौलवी असलम वड़ाइच

ग़ज़ल 3

 

अशआर 8

अपाहिज और भी कर देंगी ये बैसाखियाँ तुझ को

सहारे आदमी से इस्तक़ामत छीन लेते हैं

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मुझे अन्दर का वहशी मो'तबर होने नहीं देता

जिधर इंसानियत है ये उधर होने नहीं देता

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याद आएगा बहुत धूप में साया इन का

अपने आँगन में ही ये बूढ़ा शजर रहने दो

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ग़ैर के हाथों में क्यूँ देते हो अपनी पगड़ी

बात घर की है तो फिर बात को घर रहने दो

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लड़खड़ाए थे एक बार क़दम

'उम्र भर फिर सँभल नहीं पाए

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