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फ़ैज़ झंझानवी

1910 - 1981 | फ़ैसलाबाद, पाकिस्तान

फ़ैज़ झंझानवी

अशआर 9

आओ ग़म-ए-पुर्सिश क्या मैं शिकवे से बाज़ आया

तुम चार क़दम पीछे क्यों हो सफ़-ए-महशर से

आओ ग़म-ए-पुर्सिश क्या मैं शिकवे से बाज़ आया

तुम चार क़दम पीछे क्यों हो सफ़-ए-महशर से

ले कर अंगड़ाई उठी जब निगह-ए-हुस्न-ए-तलब

ज़र्रे ज़र्रे में उन्हें अंजुमन-आरा देखा

सर-ए-जमशेद को ख़िश्त-ए-ख़ुम-ए-सहबा से टकरा दें

गदा-ए-मय-कदा भी किस क़दर मग़रूर होते हैं

मातम न क्यों करूँ दिल-ए-साहिल-नसीब का

इस बहर-ए-ज़िंदगी में तलातुम हयात है

ग़ज़ल 16

पुस्तकें 2

 

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