बशीरुद्दीन अहमद देहलवी
ग़ज़ल 8
अशआर 12
चराग़ उस ने बुझा भी दिया जला भी दिया
ये मेरी क़ब्र पे मंज़र नया दिखा भी दिया
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
ज़ोर से साँस जो लेता हूँ तो अक्सर शब-ए-ग़म
दिल की आवाज़ अजब दर्द भरी आती है
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
कभी दर पर कभी है रस्ते में
नहीं थकती है इंतिज़ार से आँख
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
वो अपने मतलब की कह रहे हैं ज़बान पर गो है बात मेरी
है चित भी उन की है पट भी उन की है जीत उन की है मात मेरी
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
पुस्तकें 48
अन्य शायरों को पढ़िए
-
जलील मानिकपूरी
-
दत्तात्रिया कैफ़ी
-
फ़ज़ल हुसैन साबिर
-
आग़ा हज्जू शरफ़
-
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
-
बशीर बद्र
-
मस्त बनारसी
-
सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी
-
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
-
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
-
अहमद फ़राज़
-
निदा फ़ाज़ली
-
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
-
मोमिन ख़ाँ मोमिन
-
अंजुम रहबर
-
अब्दुल हमीद अदम
-
अली सरदार जाफ़री
-
रासिख़ दहलवी
-
सैय्यद मोहम्मद मीर असर
-
मजरूह सुल्तानपुरी