बख़्श लाइलपूरी
ग़ज़ल 19
अशआर 8
हमारे ख़्वाब चोरी हो गए हैं
हमें रातों को नींद आती नहीं है
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
कभी आँखों पे कभी सर पे बिठाए रखना
ज़िंदगी तल्ख़ सही दिल से लगाए रखना
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
दर्द-ए-हिजरत के सताए हुए लोगों को कहीं
साया-ए-दर भी नज़र आए तो घर लगता है
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
कोई शय दिल को बहलाती नहीं है
परेशानी की रुत जाती नहीं है
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
अहल-ए-ज़र ने देख कर कम-ज़रफ़ी-ए-अहल-ए-क़लम
हिर्स-ए-ज़र के हर तराज़ू में सुख़न-वर रख दिए
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए