संपूर्ण
परिचय
ग़ज़ल46
नज़्म40
शेर21
ई-पुस्तक157
चित्र शायरी 5
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क़ितआ58
लेख9
कहानी3
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अन्य
अली सरदार जाफ़री
ग़ज़ल 46
नज़्म 40
अशआर 21
काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा
रास्ते बंद हैं सब कूचा-ए-क़ातिल के सिवा
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- ग़ज़ल देखिए
इंक़लाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो
बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं
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सौ मिलीं ज़िंदगी से सौग़ातें
हम को आवारगी ही रास आई
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पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं
नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है
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दामन झटक के वादी-ए-ग़म से गुज़र गया
उठ उठ के देखती रही गर्द-ए-सफ़र मुझे
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क़ितआ 58
लेख 9
कहानी 3
पुस्तकें 157
चित्र शायरी 5
ज़ुल्म की कुछ मीआ'द नहीं है दाद नहीं फ़रियाद नहीं है क़त्ल हुए हैं अब तक कितने कू-ए-सितम को याद नहीं है आख़िर रोएँ किस को किस को कौन है जो बर्बाद नहीं है क़ैद चमन भी बन जाता है मुर्ग़-ए-चमन आज़ाद नहीं है लुत्फ़ ही क्या गर अपने मुक़ाबिल सतवत-ए-बर्क़-ओ-बाद नहीं है सब हों शादाँ सब हों ख़ंदाँ तन्हा कोई शाद नहीं है दावत-ए-रंग-ओ-निकहत है ये ख़ंदा-ए-गुल बर्बाद नहीं है
वीडियो 15
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