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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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अदीब सहारनपुरी

1920 - 1963 | कराची, पाकिस्तान

पूर्वाधुनिक शायरों में शामिल, परम्परा और आधुनिकता के मिश्रण की शायरी के लिए जाने जाते हैं

पूर्वाधुनिक शायरों में शामिल, परम्परा और आधुनिकता के मिश्रण की शायरी के लिए जाने जाते हैं

अदीब सहारनपुरी

ग़ज़ल 9

अशआर 7

इक ख़लिश को हासिल-ए-उम्र-ए-रवाँ रहने दिया

जान कर हम ने उन्हें ना-मेहरबाँ रहने दिया

हज़ार बार इरादा किए बग़ैर भी हम

चले हैं उठ के तो अक्सर गए उसी की तरफ़

मंज़िलें भूलेंगे राह-रौ भटकने से

शौक़ को तअल्लुक़ ही कब है पाँव थकने से

अपने अपने हौसलों अपनी तलब की बात है

चुन लिया हम ने उन्हें सारा जहाँ रहने दिया

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बाँध कर अहद-ए-वफ़ा कोई गया है मुझ से

मिरी उम्र-ए-रवाँ और ज़रा आहिस्ता

पुस्तकें 1

 

वीडियो 15

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