अब्र उठा वो ना-गहाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
नग़्मा-ज़नाँ तराना-ख़्वाँ
तुंद 'इनाँ रवाँ-दवाँ
रक़्स-कुनाँ-ओ-पर-फ़िशाँ
साक़ी-ए-बादा-फ़ाम हाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
सुर्ख़-ओ-सियाह-ओ-रोज़-ओ-शब
ग़र्क़-ए-तलातुम-ए-एनब
अर्ज़-ओ-समा-ब-सद-तरब
सीना-ब-सीना लब-ब-लब
चश्म-ब-चश्म जाँ-ब-जाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
हमहमा हाओ-हू हुमक
धूम धमक दुहल दमक
झूम झड़ी झलक झमक
गूँज गरज घुमर गमक
कोह-ओ-कमर कशाँ कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
गंग-ओ-जमन में खलबली
दश्त-ओ-जबल पे तीरगी
ताक़-ओ-रुवाक़ अगरई
पस्त-ओ-बुलंद सुरमई
अर्ज़-ओ-समा धुआँ धुआँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
अब्र-ए-सियह झुका रुका
'उम्र-ए-रवाँ रसन-ब-पा
ज़ुल्मत-ओ-नूर हम-रिदा
नस्ब है ख़ेमा वक़्त का
शाम-ओ-सहर के दरमियाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
चर्ख़-ए-तराना-बार पर
चादर-ए-ज़र-निगार पर
जादा-ए-लाला-कार पर
मेंह के हर एक तार पर
धुनकी हुई धनक दवाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
ग़र्क़-ए-नशात बहर-ओ-बर
आब-ए-ग़िना कमर कमर
थाप की गूँज अल-हज़र
झूम गए शजर हजर
कूक उठीं जवानियाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
खोल रही है बाल नय
घोल रही है सुर में लय
तोल रही है रुख़ को मय
डोल रहा है फ़र्र-ए-कै
बोल रही हैं अँखड़ियाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
सांवलियाँ महक गईं
नश्शा चढ़ा दहक गईं
मस्त हुईं बहक गईं
चूड़ियाँ सब खनक गईं
तन में कड़क उठी कहाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
रक़्स के फिर 'अलम गड़े
लय ने हवा पे नग जड़े
बजने लगे कड़े छड़े
कैफ़ में पाँव यूँ पड़े
फ़र्श हुआ रवाँ-दवाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
गाए निरत में वलवले
भाव में बोल जाग उठे
ताल के बाल खुल गए
हाथ उठे जुड़े जुड़े
क़ौस-ए-क़ुज़ह का साइबाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
झूल रहे हैं सीम-तन
झूम रहा है बाँकपन
ज़ेर-ओ-ज़बर है फूल-बन
चीख़ रहे हैं यूँ बदन
गूँज रही हैं चोलियाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
बाहमा-शोख़ी-ओ-फ़ुसूँ
ज़ेर-ए-नवा-ए-अरग़नूँ
शर्म की झलकियाँ हैं यूँ
जैसे खड़ी हैं सर-निगूँ
ब्याहियों में कुँवारियाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
उफ़ ये रक़ीक़ ओढ़नी
बूंदियों की बनी हुई
मय में समोई सरख़ुशी
नय में ढली शगुफ़्तगी
लय में पिरोई बूंदियाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
सू-ए-ज़मीं घटा चली
छाई घटा फ़ज़ा चली
गाई फ़ज़ा हवा चली
आई हवा नवा चली
ज़ेर-ए-नवा छनन छनाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
आब-ए-रवाँ शरर शरर
ओलतियाँ झरर झरर
बर्क़-ए-तपाँ करर करर
जाम-ओ-सुबू जिगर जिगर
चर्ख़-ए-कुहन घनन घनन
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
काग उड़े जला अगर
पर्दा हिला उठी नज़र
आई वो दुख़्तर-ए-क़मर
शीशे झुके बजा गजर
क़ुलक़ुल-ए-मय ने दी अज़ाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
उफ़ ये ग़ज़ाला-ख़ू सफ़र
उफ़ ये ख़रोश-ए-बाल-ओ-पर
बहर-ए-ख़ुदा ठहर ठहर
फ़र्श-ए-ज़मीं किधर किधर
चर्ख़-ए-बरीं कहाँ कहाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ
अब्र उठा वो ना-गहाँ
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