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अब्र उठा वो ना-गहाँ

जोश मलीहाबादी

अब्र उठा वो ना-गहाँ

जोश मलीहाबादी

MORE BYजोश मलीहाबादी

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    नग़्मा-ज़नाँ तराना-ख़्वाँ

    तुंद 'इनाँ रवाँ-दवाँ

    रक़्स-कुनाँ-ओ-पर-फ़िशाँ

    साक़ी-ए-बादा-फ़ाम हाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    सुर्ख़-ओ-सियाह-ओ-रोज़-ओ-शब

    ग़र्क़-ए-तलातुम-ए-एनब

    अर्ज़-ओ-समा-ब-सद-तरब

    सीना-ब-सीना लब-ब-लब

    चश्म-ब-चश्म जाँ-ब-जाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    हमहमा हाओ-हू हुमक

    धूम धमक दुहल दमक

    झूम झड़ी झलक झमक

    गूँज गरज घुमर गमक

    कोह-ओ-कमर कशाँ कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    गंग-ओ-जमन में खलबली

    दश्त-ओ-जबल पे तीरगी

    ताक़-ओ-रुवाक़ अगरई

    पस्त-ओ-बुलंद सुरमई

    अर्ज़-ओ-समा धुआँ धुआँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    अब्र-ए-सियह झुका रुका

    'उम्र-ए-रवाँ रसन-ब-पा

    ज़ुल्मत-ओ-नूर हम-रिदा

    नस्ब है ख़ेमा वक़्त का

    शाम-ओ-सहर के दरमियाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    चर्ख़-ए-तराना-बार पर

    चादर-ए-ज़र-निगार पर

    जादा-ए-लाला-कार पर

    मेंह के हर एक तार पर

    धुनकी हुई धनक दवाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    ग़र्क़-ए-नशात बहर-ओ-बर

    आब-ए-ग़िना कमर कमर

    थाप की गूँज अल-हज़र

    झूम गए शजर हजर

    कूक उठीं जवानियाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    खोल रही है बाल नय

    घोल रही है सुर में लय

    तोल रही है रुख़ को मय

    डोल रहा है फ़र्र-ए-कै

    बोल रही हैं अँखड़ियाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    सांवलियाँ महक गईं

    नश्शा चढ़ा दहक गईं

    मस्त हुईं बहक गईं

    चूड़ियाँ सब खनक गईं

    तन में कड़क उठी कहाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    रक़्स के फिर 'अलम गड़े

    लय ने हवा पे नग जड़े

    बजने लगे कड़े छड़े

    कैफ़ में पाँव यूँ पड़े

    फ़र्श हुआ रवाँ-दवाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    गाए निरत में वलवले

    भाव में बोल जाग उठे

    ताल के बाल खुल गए

    हाथ उठे जुड़े जुड़े

    क़ौस-ए-क़ुज़ह का साइबाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    झूल रहे हैं सीम-तन

    झूम रहा है बाँकपन

    ज़ेर-ओ-ज़बर है फूल-बन

    चीख़ रहे हैं यूँ बदन

    गूँज रही हैं चोलियाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    बाहमा-शोख़ी-ओ-फ़ुसूँ

    ज़ेर-ए-नवा-ए-अरग़नूँ

    शर्म की झलकियाँ हैं यूँ

    जैसे खड़ी हैं सर-निगूँ

    ब्याहियों में कुँवारियाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    उफ़ ये रक़ीक़ ओढ़नी

    बूंदियों की बनी हुई

    मय में समोई सरख़ुशी

    नय में ढली शगुफ़्तगी

    लय में पिरोई बूंदियाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    सू-ए-ज़मीं घटा चली

    छाई घटा फ़ज़ा चली

    गाई फ़ज़ा हवा चली

    आई हवा नवा चली

    ज़ेर-ए-नवा छनन छनाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    आब-ए-रवाँ शरर शरर

    ओलतियाँ झरर झरर

    बर्क़-ए-तपाँ करर करर

    जाम-ओ-सुबू जिगर जिगर

    चर्ख़-ए-कुहन घनन घनन

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    काग उड़े जला अगर

    पर्दा हिला उठी नज़र

    आई वो दुख़्तर-ए-क़मर

    शीशे झुके बजा गजर

    क़ुलक़ुल-ए-मय ने दी अज़ाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    उफ़ ये ग़ज़ाला-ख़ू सफ़र

    उफ़ ये ख़रोश-ए-बाल-ओ-पर

    बहर-ए-ख़ुदा ठहर ठहर

    फ़र्श-ए-ज़मीं किधर किधर

    चर्ख़-ए-बरीं कहाँ कहाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

    मुज़्दा हो ख़ैल-ए-मय-कशाँ

    अब्र उठा वो ना-गहाँ

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