मोहतसिब है हुआ करे कोई
रोचक तथ्य
مصرع غالب بتصرف۔
मोहतसिब है हुआ करे कोई
मत सुनो तुम बिका करे कोई
एक अफ़सर है मातहत हैं दस
किस की हाजत-रवा करे कोई
सब को पहुँचा दिया करो हिस्सा
जब भी कुछ दे दिया करे कोई
दिन को मंज़ूर हर सितम लेकिन
शब को बहला लिया करे कोई
आज कल किस की सुन रहे हैं वो
पहले ये तो पता करे कोई
शहर-ए-दहशत है ये कि दहशत-ए-शहर
तज्ज़िया तो ज़रा करे कोई
कुछ न कुछ दे दिया करो जब भी
आँख टेढ़ी किया करे कोई
कह रहा हूँ मज़ाक़ में सब कुछ
कुछ तो समझे ख़ुदा करे कोई
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