अहल-ए-दुनिया के किसी काम में आओ जाओ
अहल-ए-दुनिया के किसी काम में आओ जाओ
दौलत-ए-'इश्क़ अगर है तो लुटाओ जाओ
बात बनती नहीं जब बात बनाओ जाओ
अपने लहजे में नया-पन कोई लाओ जाओ
दश्त-ओ-सहरा में लिए वहशत-ए-दिल आए हो
तुम भी मजनूँ की तरह ख़ाक उड़ाओ जाओ
रिंद की तरह सर-ए-मय-कदा आया साक़ी
मैं हूँ तिश्ना मुझे दो घूँट पिलाओ जाओ
तुम जो चाहो तो अँधेरों को मिटा सकते हो
राह-गीरों के लिए दीप जलाओ जाओ
हम ने बरसों की मशक़्क़त से सजा रक्खा है
ख़ाना-ए-दिल है तुम्हारे लिए आओ जाओ
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