हैवान-ए-ज़रीफ़: मिर्ज़ा ग़ालिब की ख़ुश-मिज़ाजी और हाज़िर-जवाबी
मिर्ज़ा ग़ालिब की शख़्सियत में ज़िंदा-दिली और हाज़िर-जवाबी इस क़दर रची-बसी थी कि अल्ताफ़ हुसैन हाली ने उन्हें 'हैवान-ए-नातिक़' (बोलने वाले जीव) के बजाए 'हैवान-ए-ज़रीफ़' (मज़ाक़िया जीव) कहना ज़्यादा मुनासिब समझा।