ज़ौक़ और शेर-फ़हमी: तनक़ीद के दो अलग-अलग ज़ीने
ज़ौक़ हमें ख़ूबसूरती का आम एहसास तो दिलाता है लेकिन यह नहीं बता सकता कि कोई शेर क्यों अच्छा है; यह काम शेर-फ़हमी का है जो एक बा-क़ायदा तनक़ीदी अमल (आलोचनात्मक प्रक्रिया) है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
ज़ौक़ हमें ख़ूबसूरती का आम एहसास तो दिलाता है लेकिन यह नहीं बता सकता कि कोई शेर क्यों अच्छा है; यह काम शेर-फ़हमी का है जो एक बा-क़ायदा तनक़ीदी अमल (आलोचनात्मक प्रक्रिया) है।