उर्दू ग़ज़ल में सियासी शुऊर (चेतना) की शुरुआत: हसरत, फ़ैज़ या मजरूह?
तरक़्क़ी-पसंद (प्रगतिशील) शायरों, ख़ास तौर पर मजरूह सुल्तानपुरी और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को ग़ज़ल में सियासी मौज़ू (विषय) लाने का बानी (जनक) माना जाता है, लेकिन तारीख़ी हक़ीक़तें इसका सेहरा हसरत मोहानी के सिर बांधती हैं।