मीर तक़ी मीर: दुनिया से बेज़ार या ज़िंदगी की नब्ज़ पहचानने वाले?
मुहम्मद हुसैन आज़ाद की फैलाई हुई इस ग़लतफ़हमी को दूर करना कि मीर तक़ी मीर दुनिया से बेज़ार और अलग-थलग रहने वाले शायर थे, और उनके कलाम की रोशनी में समाज से उनके जुड़ाव का सुबूत।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
मुहम्मद हुसैन आज़ाद की फैलाई हुई इस ग़लतफ़हमी को दूर करना कि मीर तक़ी मीर दुनिया से बेज़ार और अलग-थलग रहने वाले शायर थे, और उनके कलाम की रोशनी में समाज से उनके जुड़ाव का सुबूत।