दिल्ली और लखनऊ: उर्दू मुशायरे की तहज़ीबी रिवायतें और अदबी नोकझोंक
फ़ारसी के ज़वाल (पतन) के बाद उर्दू मुशायरों का उरूज (उदय), दिल्ली और लखनऊ के अमीरों की सरपरस्ती, और मुशायरे के उन आदाब और नियमों का बयान जिन्होंने ज़बान को तो संवारा लेकिन तख़्लीक़ी (रचनात्मक) आज़ादी को सीमित कर दिया।