ग़ालिब का इस्तिआरा (रूपक) और आधुनिक शायरी का इबहाम (अस्पष्टता)
ग़ालिब की मुश्किल-पसंदी सिर्फ़ शब्दों का गोरखधंधा नहीं थी, बल्कि उनका पेचीदा इस्तिआरा (रूपक) और शब्द व अर्थ का मिलन आधुनिक उर्दू शायरी की बुनियादी संरचना बना।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
ग़ालिब की मुश्किल-पसंदी सिर्फ़ शब्दों का गोरखधंधा नहीं थी, बल्कि उनका पेचीदा इस्तिआरा (रूपक) और शब्द व अर्थ का मिलन आधुनिक उर्दू शायरी की बुनियादी संरचना बना।