ग़ज़ल की बनावट और आलोचना: क्या ग़ज़ल एक 'नीम-वहशियाना' विधा है?
ग़ज़ल की बनावट, उसकी 'रेज़ा-ख़याली' (बिखरे विचारों) और जुड़ाव व निरंतरता की कमी पर कलीमउद्दीन अहमद और अज़मतउल्लाह ख़ाँ की आलोचनाओं का जायज़ा, और ग़ज़ल के बचाव में पूर्वी कला दृष्टिकोण की अहमियत।