aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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इल्तिजा पर चित्र/छाया शायरी

उर्दू शायरी में इल्तिजा

(विनती) का अर्थ अपने महबूब से मिलने या उसकी झलक भर पा लेने की ख़्वाहिश से जुड़ा हुआ है । उर्दू शायरी का प्रेमी हर पल यही इल्तिजा / विनती करता हुआ नज़र आता है कि किसी तरह उसका महबूब उसके सामने आ जाए और उनका मिलन हो जाए । लेकिन प्रेमिका तो बुत-ए-काफ़िर (इंकार करने वाला बुत) है वो भला अपने प्रेमी कि फ़रियाद क्यों सुने । उर्दू शायरी का एक बड़ा हिस्सा प्रेमी के इसी इल्तिजा को नए नए अंदाज़ में पेश करता है ।

मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे

मानी हैं मैं ने सैकड़ों बातें तमाम उम्र

कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़

आज जाने की ज़िद न करो

कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़

कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़

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