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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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मिज़ाह पर स्कॉलर

हैवान-ए-ज़रीफ़: मिर्ज़ा ग़ालिब की ख़ुश-मिज़ाजी और हाज़िर-जवाबी

मिर्ज़ा ग़ालिब की शख़्सियत में ज़िंदा-दिली और हाज़िर-जवाबी इस क़दर रची-बसी थी कि अल्ताफ़ हुसैन हाली ने उन्हें 'हैवान-ए-नातिक़' (बोलने वाले जीव) के बजाए 'हैवान-ए-ज़रीफ़' (मज़ाक़िया जीव) कहना ज़्यादा मुनासिब समझा।

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