गरेबान पर ग़ज़लें
शायरी में गिरेबान तभी
गरेबान है जब वो चाक हो। गरेबान का चाक होना, पैरों में आबले आ जाना, दामन का तारतार हो जाना ही आशिक़ के जुनून ओ दीवानगी का कमाल है। हम सही सलामत गरेबान वालों को चाक-गरेबानी का ये क़िस्सा भी पढ़ना चाहिए और जुनून की तस्वीर देखनी चाहिए।