क्या साहित्य-रचना फ़नकार के दर्द का इलाज है? इर्तिफ़ा (उन्नयन) और रद्द-ए-अमल (प्रतिक्रिया) की बहस
यह मज़मून इस नफ़्सियाती (मनोवैज्ञानिक) बहस का जायज़ा लेता है कि क्या रचनात्मक काम लेखक की शख़्सियत को सँवारता है और उसके दुखों का इलाज है, या महज़ एक तकलीफ़-देह रद्द-ए-अमल (प्रतिक्रिया) है।