उर्दू और हिंदी: साझी बुनियाद और अलग पहचान
उर्दू और हिंदी की बुनियाद एक होने के बा-वुजूद, विकास के सफ़र से गुज़रकर ये दोनों दो अलग और आज़ाद ज़बानें बन चुकी हैं, इसलिए इनकी लिपि एक होना ज़रूरी नहीं।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
उर्दू और हिंदी की बुनियाद एक होने के बा-वुजूद, विकास के सफ़र से गुज़रकर ये दोनों दो अलग और आज़ाद ज़बानें बन चुकी हैं, इसलिए इनकी लिपि एक होना ज़रूरी नहीं।