लफ़्ज़ और नग़्मा: कलाम में फ़साहत और अल्फ़ाज़ की तरतीब का राज़
फ़साहत सिर्फ़ अलग-अलग अल्फ़ाज़ की ख़ूबसूरती का नाम नहीं है, बल्कि यह अल्फ़ाज़ की आवाज़ और अर्थ के उस तालमेल का नाम है जो कलाम को एक दिलकश नग़्मा बना देता है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
फ़साहत सिर्फ़ अलग-अलग अल्फ़ाज़ की ख़ूबसूरती का नाम नहीं है, बल्कि यह अल्फ़ाज़ की आवाज़ और अर्थ के उस तालमेल का नाम है जो कलाम को एक दिलकश नग़्मा बना देता है।