उर्दू रिवायत में 'दर्द-मंदी' का तसव्वुर और भीतरी टूट-फूट
उर्दू शायरी और तसव्वुफ़ (सूफ़ीवाद) में दर्द-मंदी और भीतरी दर्द को बुनियादी अहमियत हासिल है, जिसके बिना न रूहानियत मुमकिन है और न ही सच्ची शायरी।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
उर्दू शायरी और तसव्वुफ़ (सूफ़ीवाद) में दर्द-मंदी और भीतरी दर्द को बुनियादी अहमियत हासिल है, जिसके बिना न रूहानियत मुमकिन है और न ही सच्ची शायरी।