शाह गुलशन का मशवरा: वली दकनी के ख़िलाफ़ गढ़ा गया एक अदबी अफ़साना
वली दकनी को शाह गुलशन की तरफ़ से रेख़्ता-गोई (उर्दू शायरी) में फ़ारसी विषयों को बाँधने के मशवरे की कहानी दरअस्ल दिल्ली के तज़किरा निगारों (इतिहासकारों) की मनगढ़ंत उपज है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
वली दकनी को शाह गुलशन की तरफ़ से रेख़्ता-गोई (उर्दू शायरी) में फ़ारसी विषयों को बाँधने के मशवरे की कहानी दरअस्ल दिल्ली के तज़किरा निगारों (इतिहासकारों) की मनगढ़ंत उपज है।