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औरत: एक उनवान 10 नज़्में

औरत उर्दू शायरी का एक

अहम और बहुआयामी विषय है। उसके वजूद से जुड़े प्रेम, ममता, सौंदर्य, रिश्ते, वंचना, संघर्ष और आत्मबोध ने शायरों को हमेशा प्रभावित किया है। इस चयन में विभिन्न शायरों की 10 ऐसी नज़्में शामिल हैं, जिनमें औरत को अलग-अलग भावनात्मक, सामाजिक और मानवीय संदर्भों में विषय बनाया गया है। कहीं औरत प्रेम और निकटता की प्रतीक है, कहीं माँ, बेटी और महबूबा के रूप में दिखाई देती है, तो कहीं अपनी पहचान और वजूद के सवालों से जूझती हुई एक स्वाभिमानी इंसान के रूप में सामने आती है। यह संग्रह औरत से जुड़े विभिन्न काव्य-दृष्टिकोणों, भावनाओं और सामाजिक रवैयों को समझने की एक खूबसूरत साहित्यिक यात्रा है।

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औरत

उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे

कैफ़ी आज़मी

औरत

वजूद-ए-ज़न से है तस्वीर-ए-काएनात में रंग

अल्लामा इक़बाल

औरत

बाज़ार है वो अब तक जिस में तुझे नचवाया

हबीब जालिब

औरत

हक़दार जिस की हूँ वो मोहब्बत नहीं मिली

मीना नक़वी

औरत

दुनिया के लिए तोहफ़ा-ए-नायाब है औरत

रहबर जौनपूरी

औरत

ताबिश-ए-ख़ुर्शीद नूर-ए-माह पानी की झलक

शाद आरफ़ी

औरत

तू ने मेरे दुख की ख़ातिर

एजाज़ फ़ारूक़ी

औरत

बढ़ाती हूँ क़दम

तबस्सुम आज़मी

'औरत

तू वो शहकार-ए-ज़माना है जिसे दुनिया ने

बिसमिल आज़मी

औरत

महरम-ए-राज़ दिल-नवाज़ है तू

नसीम फ़ातिमा नज़र लखनवी
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