ज़हीर-उल-हसन तिश्ना
अशआर 1
पैग़ाम तो उन का आया है तुम शहर में 'तिश्ना' आ जाओ
सहरा है पसंदीदा हम को हम शहर में जा कर क्या करते
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere