ज़ब्त अंसारी
अशआर 3
इलाज-ए-दिल के लिए और अब कहाँ जाएँ
तुम्हारे शहर में सब कुछ मिला दवा के सिवा
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थे मेरी राह में लाखों बुतान-ए-नख़वत-ओ-नाज़
कहीं भी सर न झुका तेरे नक़्श-ए-पा के सिवा
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बहुत से ग़म तो दिए 'ज़ब्त' ऐसे लोगों ने
कि जिन से कोई तवक़्क़ो न थी वफ़ा के सिवा
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