सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम
ग़ज़ल 38
अशआर 50
ये किस ज़ोहरा-जबीं की अंजुमन में आमद आमद है
बिछाया है क़मर ने चाँदनी का फ़र्श महफ़िल में
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रुबाई 24
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