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शरर फ़तेह पुरी

1928 - 1992 | कैथल, भारत

शरर फ़तेह पुरी

ग़ज़ल 9

अशआर 16

उन से 'शरर' कुछ ऐसे बिछड़े

जीवन का हर सपना बिखरा

मेरे ही ख़ून में नहला के 'शरर'

वो सलीबों पे सजा देगा मुझे

अहल-ए-ख़िरद को सौंप दुनिया की बाग-डोर

कार-ए-ज़माना अहल-ए-जुनूँ को सँभाल दे

क्या थी वो दैर-ओ-हरम की दुनिया

जो भी दुनिया का ख़ुदा था क्या था

दुश्वारी-ए-हयात को दुश्वार-तर बना

जिस का जवाब बन पड़े वो सवाल दे

पुस्तकें 9

 

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