शरर बलयवी
अशआर 1
सुब्ह-दम ज़ुल्फ़ें न यूँ बिखराइए
लोग धोका खा रहे हैं शाम का
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere