रहमान मुसव्विर
ग़ज़ल 23
अशआर 2
उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देते
हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है
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मैं बाहर से उचक कर देखता हूँ
मिरे अंदर तमाशा हो रहा है
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