क़य्यूम नज़र
ग़ज़ल 14
नज़्म 11
अशआर 4
पूछो तो एक एक है तन्हा सुलग रहा
देखो तो शहर शहर है मेला लगा हुआ
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याद आया भी तो यूँ अहद-ए-वफ़ा
आह की बे-असरी याद आई
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नक़्श-ए-कफ़-ए-पा ने गुल खिलाए
वीराँ कहाँ अब ये रास्ता है
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तेरी निगह से तुझ को ख़बर है कि क्या हुआ
दिल ज़िंदगी से बार-ए-दिगर आश्ना हुआ
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