ओसामा अमीर
ग़ज़ल 33
अशआर 1
'औरत के ख़ाल-ओ-ख़द पे बहुत दाद हो कि ये
मेरे ख़ुदा का शोहरा-ए-आफ़ाक़ शे'र है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere