नवाज़ क़मर के शेर
किसी की दस्तरस में है जहान भर की ने'मतें
किसी किसी के ख़्वाब में भी ज़िंदगी उदास है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere