नक़्श लायलपुरी
ग़ज़ल 14
अशआर 4
नाम होंटों पे तिरा आए तो राहत सी मिले
तू तसल्ली है दिलासा है दुआ है क्या है
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
ये अंजुमन ये क़हक़हे ये महवशों की भीड़
फिर भी उदास फिर भी अकेली है ज़िंदगी
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
हम ने क्या पा लिया हिन्दू या मुसलमाँ हो कर
क्यूँ न इंसाँ से मोहब्बत करें इंसाँ हो कर
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
मैं दुनिया की हक़ीक़त जानता हूँ
किसे मिलती है शोहरत जानता हूँ
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए