मोहम्मद सलीम ताहिर
ग़ज़ल 7
अशआर 1
मैं तुझ से अपना तअल्लुक़ छुपा नहीं सकता
जबीं से कैसे मिटा दूँ तिरे निशान को मैं
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere