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Meer Naqi Ali Khan Saqib's Photo'

मीर नक़ी अली ख़ान साक़िब

हैदराबाद, भारत

मीर नक़ी अली ख़ान साक़िब

ग़ज़ल 15

अशआर 4

याद-ए-जानाँ उतर के आई है

शब के ज़ीने से चाँदनी की तरह

तुम्हारा लम्स मोअ'त्तर तुम्हारा जिस्म बहार

यही तो बहस गुलाबों के रू-ब-रू ठहरी

हर एक पल में हज़ारों ठहर गईं सदियाँ

नसीम-ए-सुब्ह-ए-तमन्ना मगर तू ठहरी

दर-ए-फ़िराक़ पे दम-भर को निकहत-ए-सहरी

तिरे ख़िराम की मानिंद हू-ब-हू ठहरी

पुस्तकें 4

 

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