ख़लिश कलकत्वी
ग़ज़ल 4
अशआर 1
शिकवा अपनों से किया जाता है ग़ैरों से नहीं
आप कह दें तो कभी आप से शिकवा न करें
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere