काशिफ़ सय्यद
ग़ज़ल 18
अशआर 15
रास्ते भर मिरी हम-सफ़री का दम भरते रहे
अपनी मंज़िल पे पहुँचते ही पराए हुए लोग
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राजा का बेटा राजा नहीं बनता बनते हम
बस इस लिए कहानी में मारा गया हमें
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वो दीवारों में चुनवाने का मंज़र अब नहीं दिखता
मोहब्बत पर मगर बंदिश जो पहले थी सो अब भी है
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सर्द-मेहरी आप की रिश्ते में हाइल हो गई
वर्ना हम वो आशिक़ी करते के दुनिया देखती
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क़ितआ 9
वीडियो 5
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