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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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डॉ भावना श्रीवास्तव

1981 | बनारस, भारत

नई निसाई आवाज़ों में शुमार, उम्दा शेर अपनी मुतरन्निम आवाज़ में पढ़ने के लिए मशहूर

नई निसाई आवाज़ों में शुमार, उम्दा शेर अपनी मुतरन्निम आवाज़ में पढ़ने के लिए मशहूर

डॉ भावना श्रीवास्तव

ग़ज़ल 28

नज़्म 5

 

अशआर 8

इस क़दर आँखों पे क़ाबिज़ है वो जाना उस का

इस तरफ़ आता दिखाई नहीं देता कुछ भी

ख़ामोशी जब भी ज़ाए' हो जाती थी

सहरा में जा कर चिल्लाया करते थे

फ़र्क़ कोई नहीं ख़ल्वत में कि महफ़िल में रहूँ

दर्द से मुझ को जुदाई नहीं देता कुछ भी

ये बाद-ए-सबा ख़ुशबू परिंदों की सदाएँ

हर शय उसे खिड़की पे बुलाने के लिए है

काश हम महसूस करते दुख उन आँखों का कभी

देखती रहती हैं जो हर पल किसी का रास्ता

वीडियो 9

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

डॉ भावना श्रीवास्तव

डॉ भावना श्रीवास्तव

डॉ भावना श्रीवास्तव

जब दिखाई दे रहा था ख़ुद-कुशी का रास्ता

डॉ भावना श्रीवास्तव

जब हम उस से मिल कर आया करते थे

डॉ भावना श्रीवास्तव

ज़रा देखिए तो ग़ज़ब ढा रहे हैं

डॉ भावना श्रीवास्तव

तुम्हारे बिन हमारा आशियाँ कैसा लगेगा

डॉ भावना श्रीवास्तव

वो अगर बेवफ़ा नहीं होता

डॉ भावना श्रीवास्तव

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