चराग़ शर्मा
ग़ज़ल 13
नज़्म 1
अशआर 9
उन्हों ने अपने मुताबिक़ सज़ा सुना दी है
हमें सज़ा के मुताबिक़ बयान देना है
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- ग़ज़ल देखिए
अब के मिली शिकस्त मिरी ओर से मुझे
जितवा दिया गया किसी कमज़ोर से मुझे
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हाथ भर दूरी पे है क़िस्मत की चाबी आप की
एक छोटा सा क़दम और कामयाबी आप की
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मैं ने क़ुबूल कर लिया चुप चाप वो गुलाब
जो शाख़ दे रही थी तिरी ओर से मुझे
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तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आतीं
हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आतीं
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