अख़्तर उस्मान
ग़ज़ल 16
नज़्म 8
अशआर 4
शाम आए और घर के लिए दिल मचल उठे
शाम आए और दिल के लिए कोई घर न हो
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
शहर ख़ाली है किसे ईद मुबारक कहिए
चल दिए छोड़ के मक्का भी मदीना वाले
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
ये काएनात मिरे सामने है मिस्ल-ए-बिसात
कहीं जुनूँ में उलट दूँ न इस जहान को मैं
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
वक़्त अब दस्तरस में है 'अख़्तर'
अब तो मैं जिस जहान तक हो आऊँ
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
पुस्तकें 5
वीडियो 41
This video is playing from YouTube
